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Wednesday, October 7, 2020

मौन क्यु है, प्रखर प्रवक्ता?

 मौन क्यु है, प्रखर प्रवक्ता

 एक बेटी के बलात्कार पर

 एक माॅ की चीत्कार पर

 शब्द नही या शर्म नही,

 समर्थक हैं अत्याचारी के

 मौन क्यों है प्रखर प्रवक्ता

 प्रशासन के अत्याचार पर,

 जाती के अहंकार पर 

 गलती इस मासूम की वो 

 उस भारत की बेटी थी, 

 जहां का मुखिया मौन है,

 बेटी से नाइंसाफी पर

 क्या ये गांधी का भारत है?

 या हिटलर की परछाईं है!!!

 एक बेटी के बलात्कार पर 

 जातिवाद भारी है!!

 मौन क्यू है , प्रखर प्रवक्ता

 गुप्त शव दाह पर

 आत्मा के भी बलात्कार पर

 नहीं सहेंगे अब ये चुप्पी

 नारी समता की बात है

 रावण भी जब बच ना पाया 

 तो किसी की क्या बिसात है

 तोड़ो चुप्पी वो दलित नहीं 

 इस भारत की बेटी है

 बेटी तो बेटी होती है 

 दलित या सवर्ण नहीं होती।

 मौन तोड़ो प्रखर प्रवक्ता

 जनता को इंतजार है।

Sunday, June 21, 2020

मातृत्व एक नारी का अभिमान

सदा ही चुप रहती हूँ मैं ,
मुख बंद कर सब कुछ सहती हूँ मैं
पर आज चुप रहा न जायेगा  
अब और सहा न जायेगा
क्योंकि बात मेरे मातृत्व की है 
जिस पर इतराती हूँ मैं,
अपनी जान दांव पर लगाती हूँ मैं|

एक नेता का बयान आया है 
मेरे मातृत्व पर लांछन लगाया हैं
कुपोषण का जिम्मेदार मुझे ठहराया हैं 
कोई जाकर उन्हें बताये ___________
नारी तो अपनी खून की आखिरी बूँद से भी 
अपने बच्चे को सींचती हैं|

मानवता तो तब शर्मसार होती हैं 
जब चंद भ्रष्टाचारियों के कारण ,गर्भस्थ शिशु के पोषण की वस्तुएँ 
बाजारों में बिकती हैं !!!

आज चुप रह न पाऊंगी ..........................
उन महाशय ही नहीं , सारी दुनिया को बताऊंगी
खोल दूंगी, उन भ्रष्टाचारियों की पोल
जिन्होंने पोषण बेचकर मेरे बच्चे को
कुपोषित बनाया हैं......... ...... कुपोषित बनाया हैं।

अरे............................... एक बात तो रह ही गयी
अब बात उन चंद आधुनिक महिलाओं की
जो अपने फिगर पर इतराती हैं 
शराब  पीती हैं , जंक फ़ूड खाती हैं
वो माँ बनती ही कहाँ  हैं 
वो तो कोख उधार लेती हैं|

तो माँ को कटघरे में खड़ा करने से पहले
जरा जमीन पर आइए  ____________ 
नेताजी!!! अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाइये। 

sada hi chup rahti hu mein,
mukh band rakh, sab kuch sahti hu mein,
par aaj saha na jayega
ab chup raha na jayega
kyoki bat mere matratva ki hein
jis par itrati hu mein
apni jan dav par  lagati hu mein.

ak neta ka bayan aaya hein ,
mere matratva par lanchan lagaya hein,
kuposhan ka jimmedar mujhe thahraya hein