सदा ही चुप रहती हूँ मैं , मुख बंद कर सब कुछ सहती हूँ मैं पर आज चुप रहा न जायेगा अब और सहा न जायेगा क्योंकि बात मेरे मातृत्व की है जिस पर इतराती हूँ मैं, अपनी जान दांव पर लगाती हूँ मैं| एक नेता का बयान आया है मेरे मातृत्व पर लांछन लगाया हैं कुपोषण का जिम्मेदार मुझे ठहराया हैं कोई जाकर उन्हें बताये ___________ नारी तो अपनी खून की आखिरी बूँद से भी अपने बच्चे को सींचती हैं| मानवता तो तब शर्मसार होती हैं जब चंद भ्रष्टाचारियों के कारण ,गर्भस्थ शिशु के पोषण की वस्तुएँ बाजारों में बिकती हैं !!! आज चुप रह न पाऊंगी .......................... उन महाशय ही नहीं , सारी दुनिया को बताऊंगी खोल दूंगी, उन भ्रष्टाचारियों की पोल जिन्होंने पोषण बेचकर मेरे बच्चे को कुपोषित बनाया हैं......... ...... कुपोषित बनाया हैं। अरे............................... एक बात तो रह ही गयी अब बात उन चंद आधुनिक महिलाओं की जो अपने फिगर पर इतराती हैं शराब पीती हैं , जंक फ़ूड खाती हैं वो माँ बनती ही कहाँ हैं वो तो कोख उधार लेती हैं| तो माँ को कटघरे में खड़ा करने से पहले जरा जमीन पर आइए ____________ नेताजी!!! अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाइये। sada hi chup rahti hu mein, mukh band rakh, sab kuch sahti hu mein, par aaj saha na jayega ab chup raha na jayega kyoki bat mere matratva ki hein jis par itrati hu mein apni jan dav par lagati hu mein. ak neta ka bayan aaya hein , mere matratva par lanchan lagaya hein, kuposhan ka jimmedar mujhe thahraya hein
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Sunday, June 21, 2020
मातृत्व एक नारी का अभिमान
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