बरसात की इस सुहानी शाम में, चलो एक बार फिर पुराने सफर पर चलते हैं | चलो एक बार फिर “शुरू” से शुरू करते हैं|| जहाँ न थी ,भविष्य की चिंता न अतीत की झुंझलाहट था तो बस, प्रेम प्रेम और बस प्रेम चलो एक बार फिर वर्तमान को जी लेते हैं | चलो एक बार फिर “शुरू” से शुरू करते हैं|| जहाँ न थी, कमाने की चिंता न गंवाने की परवाह था तो बस एक दूसरे का साथ, चलो एक बार फिर मैं और तुम को हम कर लेते हैं| चलो एक बार फिर “शुरू” से शुरू करते हैं|| वो बरसात जिसमें भीगकर हम हो गए थे, सदा के लिये एक चलो एक बार फिर उन लम्हों को जी लेते हैं| चलो एक बार फिर “शुरू” से शुरू करते हैं|| Barsat ki is suhani sham mein, Chalo ak bar fir Purane safar par chalet hein. Chalo ak bar fir “Shuru” se shuru karte hein. Jaha n thi, bhavishya ki chinta N atit ki jhunjhlahat Tha to bas, prem, prem aur bas prem Chalo ak bar fir Vartman ko ji lete hein. Chalo, ak bar fir “Shuru” se shuru karte hein. Jaha n thi kamane ki chinta N gawane ki parwah Tha to bas ak dusare ka sath, Chalo ak bar fir “ mein” aur “tum” ko “hum” kar lete hein. Chalo ak bar fir “Shuru” se shuru karte hein. Vo Barsat jisme bhigkar, Hum ho gaye the, sada ke liye ak Chalo ak bar fir Un lamho ko ji lete hein. Chalo ak bar Chalo ak bar fir “Shuru” se shuru karte hein.
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Sunday, June 28, 2020
Chalo Ak Bar Fir…… चलो एक बार फिर…….
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