Thursday, June 18, 2020

॥जिंदगी॥

न थी मैं पराये की
तुम्हारी अपनी हीं तो थी
फिर क्यूं खत्म कर दिया मुझें ?
माना कि थोड़ी सी मुश्किल हूँ मैं
पर इतनी भी नहीं !
कुछ अच्छा तो किया था मैंने
तुम्हारे साथ भी !!
फिर क्यूं खत्म कर दिया मुझें ?
वो प्रवासी मजदूर , भूखे – नंगे
हजारो कोस पैदल चलकर
सीने में जीवन कि आस लिये, सदैव संघर्षरत
जरा भीं प्रेरित न कर पाए तुम्हें ?
पिता का प्यार , बहनों की ममता
जरा भी विचलित न कर पाई तुम्हें ?
तो शायद तुम्हारा जाना हीं ठीक था !!!
मगर इस तरह रहस्य बनाकर
क्यूं खत्म कर दिया मुझें ?
आखिर क्यूं..., क्यूं..., क्यूं...........................????

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