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Friday, October 9, 2020

हाय री विडंबना !!!!

 हाय री विडंबना

नारी तेरी!!!!

चीर भी तेरा !

मौत भी तेरी !

दोषी भी तू ही कहलाएगी!!!

उन्नीसवीं हो या इक्कीसवीं सदी

तू ही कोसी जाएगी!!

पुरुषत्व के अहम को पोषने 

नोचते समुह में

एक शेरनी को,

जब तक धूल नहीं चटाएगी

चाहे सीता हो , द्रोपदी हो या 

हो निर्भया 

हर युग में तू ही

दुत्कारी जाएगी

तू ही कोसी जाएगी।


आखरी चंद  पक्तियां ( महिला नेत्रिओ )  के लिए

माना पार्टी का दबाव हैं,

सत्ता से प्रगाढ़ लगाव है

पर मत भूलो अपने अस्तित्व को

नारी के स्वरूप को

बेटी तुम भी हो किसी की

शायद तुम्हारी भी बेटी हो

बेटी शायद ना भी हो ,

मां से नज़रे कैसे मिलाओगी

जब एक बेटी के चरित्र पर 

लांछन लगाओगी ।